कीनन स्टेडियम जमशेदपुर का सबसे पुराना और ऐतिहासिक क्रिकेट मैदान है। यह एक बहु-उपयोगी स्टेडियम है, जिसे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के रूप में भी जाना जाता है। वर्तमान समय में यहाँ मुख्य रूप से क्रिकेट और फुटबॉल मैच खेले जाते हैं, साथ ही यह मैदान तीरंदाजी प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए भी प्रसिद्ध है।
डालमा पहाड़ियों और टाटा स्टील कारखानों की चिमनियों की पृष्ठभूमि में स्थित यह स्टेडियम क्रिकेट प्रेमियों को एक बेहद सुंदर और यादगार अनुभव प्रदान करता है। अपने लंबे इतिहास और कई ऐतिहासिक मुकाबलों के कारण कीनन स्टेडियम को पूर्वी भारत में क्रिकेट का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।


सामान्य जानकारी (About)
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| स्थापना वर्ष | 1939 |
| नामकरण | जॉन लॉरेंस कीनन |
| क्षमता | 19,000 दर्शक |
| एंड नाम | डालमा हिल्स एंड, नौरोजी पवेलियन एंड |
| फ्लड लाइट | नहीं |
| घरेलू टीम | बिहार (पूर्व में), झारखंड |
| स्वामित्व | टाटा स्टील |
| स्थान | नॉर्दर्न टाउन, बिष्टुपुर, जमशेदपुर |
नामकरण और प्रशासनिक महत्व
इस स्टेडियम का नाम जॉन लॉरेंस कीनन, टाटा स्टील के पूर्व जनरल मैनेजर, के सम्मान में रखा गया है। क्रिकेट प्रशासन की दृष्टि से भी कीनन स्टेडियम अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि झारखंड राज्य क्रिकेट संघ (JSCA) का मुख्यालय इसी मैदान के परिसर में स्थित है।
निर्माण और प्रारंभिक इतिहास
कीनन स्टेडियम का निर्माण वर्ष 1939 में मात्र ₹25,000 की अनुमानित लागत से किया गया था। इसी वर्ष दिसंबर में इस मैदान ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण किया, जब बिहार ने रणजी ट्रॉफी मुकाबले में बंगाल की मेज़बानी की। निर्माण के बाद से ही यह मैदान बिहार (अविभाजित) और बाद में झारखंड राज्य के लिए घरेलू क्रिकेट का प्रमुख केंद्र बना रहा।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की शुरुआत
घरेलू और अभ्यास मैचों की नियमित मेज़बानी के बावजूद, कीनन स्टेडियम को अपने पहले अंतरराष्ट्रीय मैच के लिए काफ़ी इंतज़ार करना पड़ा।
7 दिसंबर 1983 को यहाँ पहला वनडे अंतरराष्ट्रीय मुकाबला खेला गया, जिसमें भारत का सामना वेस्टइंडीज से हुआ।
यह वही समय था जब क्लाइव लॉयड की अगुआई वाली वेस्टइंडीज टीम 1983 विश्व कप फाइनल की हार के बाद भारत दौरे पर “मिशन रिवेंज” के साथ आई थी। इस मैच में वेस्टइंडीज ने भारत को 104 रनों से हराया।
वनडे अंतरराष्ट्रीय मैचों में शतक (One Day Internationals – Centuries)
| क्रम संख्या | स्कोर | खिलाड़ी | टीम | गेंदें | पारी | विरोधी टीम | मैच तिथि | परिणाम |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | 115 | गॉर्डन ग्रीनिज | वेस्टइंडीज | 134 | 1 | भारत | 7 दिसंबर 1983 | जीत |
| 2 | 149 | विवियन रिचर्ड्स | वेस्टइंडीज | 99 | 1 | भारत | 7 दिसंबर 1983 | जीत |
| 3 | 106 | मनोज प्रभाकर | भारत | 121 | 1 | पाकिस्तान | 26 मार्च 1987 | हार |
| 4 | 107* | मार्टिन क्रो | न्यूज़ीलैंड | 129 | 2 | भारत | 15 नवंबर 1995 | जीत |
| 5 | 105* | सौरव गांगुली | भारत | 139 | 2 | दक्षिण अफ्रीका | 12 मार्च 2000 | जीत |
| 6 | 101 | सलमान बट | पाकिस्तान | 116 | 1 | भारत | 9 अप्रैल 2005 | जीत |
वनडे अंतरराष्ट्रीय मैचों में पाँच विकेट (Five-Wicket Hauls – ODIs)
| क्रम संख्या | गेंदबाज़ | तिथि | टीम | विरोधी टीम | पारी | ओवर | रन | विकेट | इकॉनमी | आउट किए गए बल्लेबाज़ | परिणाम |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | राना नवेद-उल-हसन | 9 अप्रैल 2005 | पाकिस्तान | भारत | 2 | 8.4 | 27 | 6 | 3.11 | वीरेंद्र सहवाग, सौरव गांगुली, एमएस धोनी, युवराज सिंह, इरफान पठान, आशीष नेहरा | जीत |
221 रनों की ऐतिहासिक साझेदारी
इस मुकाबले को ऐतिहासिक बनाने वाली घटना थी गॉर्डन ग्रीनिज और विवियन रिचर्ड्स की दूसरी विकेट के लिए 221 रनों की साझेदारी। दोनों बल्लेबाज़ों ने कीनन स्टेडियम के छोटे मैदान का भरपूर फायदा उठाते हुए गेंद को बार-बार मैदान के बाहर सड़क तक पहुँचा दिया। यह साझेदारी आज भी वेस्टइंडीज क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ रिकॉर्ड्स में गिनी जाती है।
सौरव गांगुली की कप्तानी में ऐतिहासिक जीत
सौरव गांगुली, जिन्हें “प्रिंस ऑफ कोलकाता” के नाम से जाना जाता है, की कप्तानी में भारत ने दक्षिण अफ्रीका को 6 विकेट से हराया। इसी मैच में गांगुली ने शानदार शतक लगाकर भारत को कीनन स्टेडियम में पहली अंतरराष्ट्रीय जीत दिलाई।
पिच और आउटफील्ड की विशेषताएँ
कीनन स्टेडियम की पिच को भारत की सर्वश्रेष्ठ पिचों में से एक माना जाता है। यह आमतौर पर बल्लेबाज़ों के लिए मददगार रही है, लेकिन गेंदबाज़ों को भी यहाँ पर्याप्त अवसर मिलते हैं। इस मैदान का आउटफील्ड बेहद तेज़ और हरा-भरा है। क्रिकेट जानकारों के अनुसार, भारत में केवल मोहाली का आउटफील्ड ही कीनन से बेहतर माना जाता है।
क्रिकेट का मक्का और सुनहरे पल
पूर्वी भारत में कीनन स्टेडियम को क्रिकेट का “मक्का” कहा जाता है। पिछले 70 वर्षों में इस मैदान ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। यहाँ खेले गए मैचों में कई यादगार पल शामिल हैं:
- भारत की पहली जीत में रॉबिन सिंह की अहम भूमिका
- अजित आगरकर की गेंद पर सरवान का अंतिम गेंद का चौका
- डैनी मॉरिसन के खिलाफ सचिन तेंदुलकर के चार लगातार चौके



